Viagra for Female

सोमवार, 10 अगस्त 2020

स्वस्थ भोजन की थाली(Hindi) Current NUTRITIONAL SCENARIO 2020

 आइए जानते हैं  पोषण एवं कुपोषण से क्यों परेशान है

Nutrition क्या है   ?

( Malnutrition ) कुपोषण क्या है   ? 


आज के भागदौड़ वाली जिंदगी में स्वास्थ्य के प्रति हम कितनी लापरवाह होते जा रहे हैं की अपने बारे में सोचते/  सोचती भी नहीं , हम अपने बॉडी के आधार को ही भूलने लगे हैं  इसको हम मशीनों की तरह Use करने लगे हैं लेकिन यह machine नहीं है यह शरीर है यह तेल (Oil) से नहीं चलती ,
यह चलती है - प्रोटीन, विटामिन ,मिनरल्स ,वाटर और बहुत से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स , इसके बारे में सोचने के लिए हमारे पास समय ही नहीं है हम सिर्फ पैसे ,बाहरी सुख के लिए दौड़ रहे हैं जो सुख शरीर को देना है वह  नहीं दे रहे हैं  शरीर को कैसे एनर्जी से परिपूर्ण रखे, उसको कोई बीमारी ना लगे, इसके बारे में हम ध्यान ही नहीं दे रहे हैं ,
लेकिन यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि केवल हम भारतीय ही इस से पीड़ित हैं पूरा विश्व पीड़ित है. जिसका नाम है कुपोषण ,लैक आफ न्यूट्रिशन .(Lack of Nutrition)

 हम इस वेबसाइट  /Blogs में जानेंगे -

1.  आज के परिवेश में क्या खाना चाहिए? 
2. कुपोषण से कैसे बचें
3. कुपोषण से होने वाले रोगों के बारे में जानकारी
4. संतुलित आहार हर उम्र के लोगों के लिए /  डाइट प्लान
5. मोटापा कैसे दूर भगाएं / वजन घटाना या बढ़ाना Lose weight or Gain
6. व्यायाम या एक्सरसाइज
7. मानसिक स्थिति या स्ट्रेस से कैसे बचें
8. रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाएं
9. एक्यूप्रेशर की सहायता से रोगों को दूर करना.
10 योगा एवं मेडिटेशन.

पोषण की जरूरत हर वर्ग में अलग होती है जैसे कि - गर्भावस्था के दौरान महिला का पोषण ,
और  जन्मे बालक का पोषण,
बढ़ते  बालक का पोषण,
खिलाड़ी के लिए पोषण ,
मजदूर और   वृद्धा अवस्था, घर में रहने वाले व्यक्तियों के लिए अलग-अलग पोषण की जरूरत होती है!

 हमारे भारतीय समाज में भोजन में पोषण Nutrition तो होता है लेकिन वह हर उम्र वर्ग के हिसाब से ठीक नहीं होता है
 भारतीय घरों में जो   रसोई बनती है वह सभी वर्ग के लिए पोषण समान होता है लेकिन हमको जो चाहिए वह अलग अनुपात में चाहिए इसलिए ,यहां पर पोषण  से जुड़े मामले ज्यादा पाए जाते हैं
 पोषण की कमी से बच्चों के दिमाग का विकास , शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है!  और यह बहुत आसानी से रोगों के शिकार हो जाते हैं

पोषण की कमी से बच्चों के दिमाग का विकास , शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है!  और यह बहुत आसानी से रोगों के शिकार हो जाते हैं
  प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग - मेरेसमस , क्वासरकोर
 जैसे रोगों से भारतीय बच्चे पीड़ित हो रहे हैं !
 कुछ जगह यह यह दिक्कत गरीबी व भुखमरी की वजह से है
, लेकिन एक वर्ग है जहां पर हर सुविधा उपलब्ध होते हुए भी वह फास्ट फूड खाकर अपने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ  खिलवाड़ कर रहे हैं , वे नहीं जानते कि उनका बच्चा जो फास्टफूड खा रहा रहा है उसमें केवल कार्बोहाइड्रेट की अधिकता है ना कि प्रोटीन, विटामिंस की और हमारे शरीर को जो चाहिए वह संतुलित  आहार चाहिए,
 असंतुलित भोजन का एक परिणाम भारत में दिखने लगा है वह है बच्चों में मोटापा या उनके मानसिक विकास का कम होना!



किंतु भोजन  में पोषण की कमी का असर युवा, बुजुर्ग, महिला ,पुरुष ,सभी वर्ग में दिखने लगा है -
1.जल्दी थक जाना
2.शारीरिक उर्जा की कमी की कमी
3.ऑस्टियोपोरोसिस, Osteoporosis
4. प्रजनन में दिक्कत महिला या पुरुष दोनों में,( Infertility)
5. रतौंधी ( Night blindness)
6. बालों का गिरना( Hair Fall) ,
7. असमय सफेद होना
8. पैरों में दर्द व जलन
इत्यादि
बहुत से लोग इस रोग से पीड़ित होंगे जिसका मुख्य वजह है
शरीर को सही पोषण ना मिलना  ,
शरीर का  ठीक से काम ना करना यह सभी लक्षण असंतुलित भोजन की वजह से है और अगर हम सभी जल्दी इसको नहीं सचेते तो आने वाले दिनों में परिणाम बहुत ही भयावह होगा!


अगर व्यक्ति सही पोषण अपने शरीर को देने लगे तो वह 100   वर्ष तक जी सकता है लेकिन हमारे वातावरण में परिवर्तन और हमारे भोजन में परिवर्तन की वजह से हमारी उम्र 70 के पास आकर रह गई है !

हमारे भोजन में जो परिवर्तन  हुआ है ,
वह 3 स्टेप में है-

1.  भोजन को पैदा करने का तरीका या कल्टीवेशन
2.  भोजन का स्टोरेज का तरीका
3.   भोजन का पकाने का तरीका

 यह तीनों स्टेप हमारे भोजन से पोषण को छीन लिया है

भोजन को पैदा करने का तरीका-


अब आपका यह प्रश्न होगा कि पोषण को कैसे छीन लिया है -
 तो आप जानिये की भोजन जो पैदा होता है किसान द्वारा , वहां पर बहुत से पेस्टिसाइड एवं खाद जैसे यूरिया , डीएपी का प्रयोग होता है जिस से ऊपज तो बढ़ जाती है लेकिन जाने अनजाने में इसकी   मात्रा  हमारे भोजन में पहुंच जाता है,

भोजन का स्टोरेज का तरीका-


आप सभी जानते हैं कि जिस प्रकार से हम भोजन को स्टोर कर रहे हैं उसमें भी गेमैक्सीन पाउडर या बहुत अलग से केमिकल का   प्रयोग करते हैं जिससे उसमें कीड़े या फफूंदी  ना लगे,
 और कुछ भोजन जैसी सब्जियां, फल  का हमारे तक पहुंचने में 2 से 4 दिन लग जाते हैं इसमें इनकी गुणवत्ता में कमी आ जाती है,
 और इसके बाद हम सभी फल सब्जियों को रेफ्रिजरेटर में रखकर उस में पाए जाने वाले विटामिंस की गुणवत्ता को कम कर देते हैं
जो फल सब्जी हमने खाया उसका प्रचुर मात्रा में उपयुक्त विटामिंस का उपयोग नहीं कर पाए!

भोजन का पकाने का तरीका-


 हम सभी जानते हैं कि जो भोजन हम पका रहे
गैस की नीली फलेम पर  जिसका तापमान बहुत ही अधिक होता है उस तापमान पर   विटामिंस Vitamin के गुण खत्म हो जाते हैं
उसके अलावा हम सभी प्रेशर कुकर व जो रोटियां सेकते हैं, डायरेक्ट नीली फलेम के कांटेक्ट पर सेकाई करते हैं ,  इन वजहों से भी भोजन की गुणवत्ता में कमी आ जाती है!
हम सभी अपने हिसाब से तो अच्छी क्वालिटी का भोजन करते हैं लेकिन यह पद्धतियां उनकी गुणवत्ता को कम कर देती है!

पोषण को जानने से पहले हम पहले देखेंगे

कुपोषण क्या है   ? 

 


इतना सब सीखने के बाद हम अगले ब्लॉग में जानेंगे कुपोषण के कारण और न्यूट्रिशन...
आप सभी से मुलाकात होगी नेक्स्ट ब्लॉग में तब तक के लिए नमस्कार ,
धन्यवाद

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

Vitamin A is essential for 9-36 month children


बच्चों में विटामिन ए की कमी की रोकथाम

* विटामिन ए बच्चों के लिए क्यों आवश्यक है?

* विटामिन ए की कमी को पहचान बच्चों में कैसे करें
 और  9 से 36 माह के उम्र के बच्चों में विटामिन ए की कमी की रोकथाम
 और कमी के लक्षणों को दूर करने हेतु विटामिन ए की खुराक किस मात्रा में और कितनी बार दें |

1. Vitamin A  विटामिन ए संबंधी कुछ आवश्यक बातें

 विटामिन ए बच्चों के लिए आवश्यक है -
शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाकर बीमारी की गंभीरता और अवधि में कमी लाने के लिए |
• आंखों को स्वस्थ बनाने और अंधेपन को रोकने के लिए |
• विटामिन ए की कमी के कारण बच्चों को दिए जाने वाले आहार में विटामिन ए की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों का कम होना, अथवा नवजात शिशु को कोलोस्ट्रम खींच तथा मां का दूध ना मिलना |
• कुपोषण एवं अन्य बीमारी जैसे खसरा, दस्त, स्वसन, संबंधित संक्रमण आदि का होना जो विटामिन ए के अवशोषण में कमी लाती है और शरीर में विटामिन ए की क्षति होती है 
• शरीर में विटामिन ए की कमी के परिणाम 
• बच्चों में संक्रमण से लड़ने की शक्ति घट जाती है जिससे उनके बीमार होने तथा मित्र की संभावनाएं बढ़ जाती है|
• आंखों में   रतौंधी, बिटाट स्पॉट , किरैटोमलेशिया कार्निवल अल्सर और अंधेपन की संभावनाएं बढ़ जाती है |
• विटामिन ए की कमी के लक्षण आसानी से पहचाने जाने वाले विश्वसनीय मापदंड
• रतौंधी, विटाट स्पॉट 
• 2 वर्ष से बड़े बच्चों के लिए उनके घर वालों से निम्न प्रश्न पूछे |
• यदि इनमें से कोई भी प्रश्न का उत्तर हां है तो बच्चे को रतौंधी है

1. क्या आपके बच्चे को रात में या अंधेरे में या दिन में देखने में कठिनाई होती है 
2. क्या बच्चा शाम को अंधेरा होने के बाद घर से बाहर अथवा अंधेरे कमरे में जाने से   हिचकिचाता है? 
3.  क्या अंधेरा होने के पश्चात घर के एक कोने में बैठना पसंद करता      है? 
4. क्या रात होने पर बच्चा दीवार या अन्य किसी वस्तु से टकरा जाता       है ? 
5. क्या आपके बच्चे को रतौंधी है? 

 विटाट स्पॉट  की पहचान आंखों में निम्न लक्षणों से होती है-

 1st आंख की ऊपरी झिल्ली पर तिकोने चीजी या फोमी धब्बे का पाया जाना|
  आंख की ऊपरी झिल्ली का चिकना तथा चमकदार के स्थान पर सुखा, खुरदरा होना, 

 उपयुक्त मात्रा में विटामिन ए होने से बच्चों को लाभ
* बाल मृत्युदर में लगभग 23% की कमी लाई जा सकती है, 
*  खसरे से होने वाले व्यक्तियों में 50% की कमी लाई जा सकती है,  *  अतिसार में होने वाले मृत्यु से में 40% की कमी लाई जा सकती है,     विटामिन ए की कमी से रोकथाम के उपाय केवल स्तनपान 6 माह तक बच्चे के जन्म के आधे घंटे के अंदर मां बच्चे को अपना दूध पिला दे, 
* मां अपना पहला दूध खीर या कोलोस्ट्रम जो प्रथम तीन दिन तक निकलता है बच्चे को अवश्य पिलाएं ,
* शिशुओं में कोलोस्ट्रम विटामिन ए का मुख्य स्रोत होता है शुरुआत के 6 महीने माताएं बच्चे को सिर्फ अपना दूध पिलाएं, पानी धुटी, शहद,  भी ना दें ,
*  6 माह के बाद पूरक और ठोस आहार सीमा के पास से मां बच्चे को आदत ठोस आहार देना शुरू करें-  जैसे चावल, दाल ,रोटी, हरी सब्जियां इत्यादि का मिश्रण, जिसमें थोड़ा तेल मिला हो वह दिन में 3 से 5 बार अवश्य दें
 *  मां बच्चे को विटामिन ए से भरपूर खाद्य पदार्थ दें साथ में मां बच्चे को अपना दूध पिलाती रहें ,
*  मां बच्चे को अपना दूध कम से कम 2 वर्ष तक अवश्य पिलाएं,
विटामिन ए की नियमित खुराक देना, पहली खुराक 9 से 12 महीने की आयु  के हिसाब से टीके के साथ नियमित टीकाकरण के समय बच्चे को प्राप्त  हुई है|

सोमवार, 15 जून 2020

NUTRIENTS TO LOOK FOR AT 6-24 MONTHS | Nutrition Guide



Nutrition For 6 month- 2 Year children

6 माह से 2 साल के बच्चों में ऊपरी आहार 

बच्चे के क्षेमा पूरा हो जाने के बाद मां का दूध उसके पोषण के लिए पर्याप्त नहीं होता उसे मां के दूध के साथ ऊपरी पूरक आहार देना भी आवश्यक हो जाता है
बच्चे का पूरक आहार कब शुरू करना चाहिए और क्यों बच्चे के छे मां यानी कि 180 दिन पूरा होने पर पूरक आहार देना शुरू करें 6 माह के बाद बच्चा तीव्रता से बढ़ता है तथा उसे अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है जो केवल स्तनपान से पूर्ण नहीं होती है

 7 खाद्य समूह हैं 
1.अनाज कंद और मूल 

2. दालें फलियां एवं मेवा 
3. दूध एवं दुग्ध उत्पाद 
4. मांसाहारी भोजन 
5. विटामिन A युक्त पीले फल व सब्जियां 
6.  हरी पत्तेदार सब्जियां एवं अन्य फल
7. अंडे 

ऊपर दिए गए खाद्य समूह में से कम से कम 4 खाद्य समूह दैनिक आहार में शामिल करें, 

आयु के अनुसार पूरक आहार देने के दौरान कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए? 

6 से 8 माह के शिशु के लिए

घर का बना हुआ ताजा एवं  Semi solid आहार मसल कर देना चाहिए तरल भोजन ना दें 
अंडा दही दलिया गाड़ी दाल गहरी हरी पत्तेदार सब्जियां या पीले फल दे दिन में दो बार आधी आधी कटोरी दे
 ( कटोरी = 250 ग्राम) 
 अतिरिक्त उर्जा के लिए एक चम्मच अतिरिक्त देसी घी / तेल भोजन में डालें |

 9 से 11  माह के शिशु के लिए

बच्चे को समय दें एवं स्वयं समय से भोजन करने की आदत डालें
 अंडा, दही ,दलिया, गाड़ी दाल ,गाड़ी हरी पत्तेदार सब्जियां या पीले फल दे
 दिन में तीन बार आधी कटोरी एवं एक से दो बार पौष्टिक नाश्ता (जैसे पका हुआ पपीता पका आम दही उबला अंडा) दे

12 से 23 माह के शिशु के लिए

 बच्चे को स्वयं अलग थाली या कटोरी में भोजन दें
बच्चे को स्वयं भोजन करने के लिए प्रोत्साहित करें
 दिन में तीन बार पूरी कटोरी   एवं एक से दो बार पोस्टिक नाश्ता दे 
बीमारी के दौरान बच्चे की भोजन के बारे में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? 
बीमार बच्चे को भोजन कराना कम या बंद नहीं करें
 स्तनपान जारी रखें 
शिशु को पसंद के अनुरूप आहार दें 
बीमारी की   दौरान बच्चा कमजोर हो जाता है ठीक होने के उपरांत उसके खाने की मात्रा बढ़ा दे जब तक कि शिशु का वजन पहले के बराबर ना हो जाए

अनिच्छा से खाने वाले या कम खाने वाले बच्चे को कैसे भोजन खिलाए? 

जब शिशु को भूख लगे तभी भोजन कराएं भोजन को बदल बदल कर दें बच्चे के पेट को पानी जूस चॉकलेट चिप्स कुरकुरे शरबत आदि से नहीं भरे 
प्रत्येक  कौर खाने पर शिशु को प्रोत्साहित करें बच्चे को समय दें एवं बच्चे को भोजन कराते समय धैर्य रखें व खाना खिलाते समय कभी भी जबरदस्ती ना करें

बच्चों में Micro  पोषक तत्व
(Vitamin, Iron, Iodine, Zinc-ORS    ) 

आहार के अलावा सुषम पोषक Micro nutrition तत्वों में पोषक से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है साथ ही उचित मानसिक व शारीरिक विकास होता है

क्या आप जानते हैं कि बच्चों को आयरन सिरप क्यों और कब देना चाहिए  ? 

 छोटे बच्चों में आयरन Iron की कमी से एनीमिया (Anemia ) एक गंभीर समस्या होती है या बच्चों के मानसिक विकास व बुद्धि को प्रभावित करती है
Iron देने से बच्चों में खून की कमी को रोका जा सकता है 
6 माह का होते ही बच्चे को आयरन सिरप पिलाना आरंभ करें 
6 माह से 5 वर्ष तक सभी बच्चों को 1ml सप्ताह में दो बार दें

क्या आप जानते हैं कि बच्चों को विटामिन ए कब और क्यों देना चाहिए ? 

  9 माह का होते ही बच्चे को विटामिन ए (Vitamin A) सिरप  पिलाया जाता है विटामिन ए से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा आंख से संबंधित रोगों से बचाता है 
9 माह से 5 वर्ष तक सभी बच्चों को साल में दो बार 6 से 6 माह के अंतराल पर कुल 9 बार विटामिन  दे 
पहली खुराक मिजलस या खसरा के टीके और दूसरी खुराक में मील बूस्टर के साथ डेढ़ साल पर दी जाती है 
तीसरे से चौथा खुराक 6 माह के अंतराल पर (जून और दिसंबर माह में) दी जाती है 
 जच्चा-बच्चा सुरक्षा कार्ड पर विटामिन ए की खुराक को दर्ज करवाएं

क्या आप जानते हैं कि  आयोडीन युक्त नमक का सेवन क्यों करना चाहिए  ? 

 आयोडीन (Iodine) मानसिक विकास के लिए आवश्यक तत्व है गर्भावस्था के दौरान व जीवन के पहले 2 वर्ष तक जब मस्तिष्क का विकास होता है इसका प्रयोग आवश्यक है
 पूरे परिवार विशेषता गर्भवती व छोटे बच्चे हेतु घर पर भोजन में आयोडीन युक्त नमक का ही प्रयोग करें
 आयोडीन घेघा जैसे रोगों से बचाव करता है

क्या आप   जानते  हैं ORS  एवं जिंक का प्रयोग कब और कैसे करना चाहिए ?

बार बार दस्त होने से बच्चा कुपोषित हो जाता है वर्ष एवं जीव का प्रयोग बच्चों में दस्त की रोकथाम के लिए किया जाता है 
दस्त के दौरान 2 माह से 6 माह तक के बच्चों में मां का दूध जारी रखें और साथ ही ओआरएस का घोल तब तक पिलाएं जब तक बच्चे का दस्त न जाए साथ में जिंक की आधी आधी गोली 14 दिनों तक लगातार दें|

 दस्त के दौरान 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में स्तनपान भोजन जारी रखें और 7 वर्ष का गोल तब तक पिलाएं जब तक बच्चे का दस्त नारों के साथ में जिंक की एक-एक गोली 14 दिनों तक लगातार दो वर्ष Zinc की गोली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से प्राप्त करें |

 पोषण से संबंधित कोई प्रश्न हो तो comment   करें |
धन्यवाद

बुधवार, 3 जून 2020

Baby Nutrition 0-6 Months -Breast Milk offers the Best Nutritional Start




आइए इसमें हम जानेंगे- 0 से 6 माह तक के बच्चों में शीघ्र व केवल स्तनपान


Baby Nutrition 0-6 Months -Breast Milk offers the Best Nutritional Start


जन्म के तुरंत बाद स्तनपान एवं छह माह तक केवल मां का दूध देने से शिशु को सभी पोषक तत्व मिलते हैं और शिशु बीमारियों से बचा रहता है इसका विकास सही होता है  |
समूह चर्चा के दौरान पता चलता है बहुत सी  माता अपने शिशु को 6 माह से पहले ही कुछ अन्य के दाने मुंह में डाल देती है, जो कि गलत है  ,
स्तनपान कब आरंभ करना चाहिए और कब तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए  ?


जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के अंदर नवजात शिशु को स्तनपान कराएं , इससे दूध  भी जल्दी उतरता है जो मां के दूध की निरंतरता बन जाती है,
 शिशु को उचित पोषण भी मिलता है,
 शिशु को 6 माह तक केवल मां का दूध दे पानी भी नहीं दे,
 मां के दूध में शिशु की आवश्यकता अनुसार पानी होता है |


क्या बच्चे को मां के दूध के अलावा कुछ और भी देना चाहिए यह Question आता है   
शिशु को पानी, घूटी, शहद ,चीनी का पानी, गाय या भैंस का दूध आदि कुछ भी नहीं पिलाएं ,केवल मां का पहला   पीला गाढ़ा दूध जिसको खीश कहते हैं , जरूर दें यह बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है वह संक्रमण से बचाव करता है
डॉक्टर के निर्देशानुसार आवश्यकता पड़ने पर ओ आर एस (ORS), वैक्सीन,  विटामिन, MINERAL,  का सिरफ दे सकते हैं |


माँ और  बच्चे को स्तनपान से क्या लाभ हैं  ?


Breastfeeding   कराने से मां को लाभ -
*जन्म  के तुरंत बाद स्तनपान से गर्भाशय  सिकुड़ने में सहायता मिलती है |
* प्रसव पश्चात प्लेसेंटा जल्द बाहर आता है |
* प्रसव के बाद अधिक खून बहने का खतरा घट जाता है | 


स्तनपान से Newborn baby को लाभ-


* मां का दूध 6 माह तक शिशु के मानसिक एवं शारीरिक विकास (Mental and Physical)  के लिए संपूर्ण आहार है |
* मां का दूध उसको रोगों से बचाता है
* चाइल्ड को मां के शरीर से  गर्माहट मिलती है
* माता और शिशु में घनिष्ठ और स्नेह और और संबंध बनता है


दूध पिलाते समय मां और बच्चे की अवस्था क्या होनी चाहिए ?
 
मां आराम से अपने पीठ का सहारा देते हुए बैठे और बच्चे को कमर एवं निचले भाग से सहारा देकर पकड़े,
बच्चे को शरीर का चेहरा मां के शरीर की तरफ मुड़ा हो,
दूध पीते समय बच्चे का निचला ओठं नीचे की ओर झुका हुआ हो और मुख बड़ा खुला हुआ हो एवं नाक मां के स्तन को छू रही हो |  मां के   स्तन का अधिकतर भूरा भाग बच्चे के मुंह के अंदर हो तथा  बच्चे के दूध गटकने की आवाज सुनाई दे |


मां का दूध शिशु के लिए पर्याप्त है इसका पता कैसे करें ?


* Newborn baby 24 घंटे में कम से कम 6 बार पेशाब करता करता हो,
* ठीक से सोता एवं एवं खेलता हो |
* शिशु का वजन बढ़ रहा हो |


 स्तनपान के दौरान मां के दूध की पर्याप्त मात्रा कैसे बनाएं रखें ?
आवश्यकता है कि Mother द्वारा शिशु को बार - बार  दूध पिलाएं,
 जब भी  बच्चा चाहे ,
दिन और रात दोनों समय
मां के दूध के बच्चे को 0 से 6 महीने   तक ऊपर से कुछ भी नहीं दें, पानी भी नहीं |
Important:-
World Breastfeeding Week 2020 will begin on
Saturday, 1 August
and ends on
Friday, 7 August
"World Breastfeeding Week is celebrated every year from 1 to 7 August to encourage breastfeeding and improve the health of mothers and babies. It commemorates the Innocenti Declaration signed in 
August 1990 by government policymakers, WHO, UNICEF and other organizations to protect, promote and support breastfeeding."


रविवार, 10 मई 2020

गर्भावस्था के दौरान आहार - Pregnant Women for Food

गर्भावस्था के दौरान आहार-

 Nutritious foods to eat when you're Pregnant



गर्भावस्था के दौरान औसतन 9 से 11 किलो वजन बढ़ता है  ! 

आमतौर पर गर्भावस्था के 9 महीनों के दौरान गर्भवती का वजन 9 से 12 किलो ग्राम तक बढ़ना चाहिए, 

पहली तिमाही में गर्भवती का वजन लगभग 2 से 3 किलो ग्राम  बढ़ता है, 

शेष समय में लगभग 9 किलोग्राम वजन की बढ़ोतरी  गर्भावस्था काल के अंतिम 6 महीनों में होती है, 

अंतिम 6  महीनों में हर महीने लगभग 1 किलो वजन तो बढ़ना किलो वजन तो बढ़ना ही चाहिए |

गर्भधारण के समय महिला का वजन 40 किलोग्राम से कम नहीं होना चाहिए
इसलिए गर्भवती को हर महीने वजन लिया जाना चाहिए ताकि उसकी वजन में हो रही बढ़ोतरी पर नजर रखी जा सके और जच्चा-बच्चा किसी संभावित खतरे से बचे रहें


गर्भावस्था के दौरान आहार-

(Nutrition During Pregnancy)


* गर्भावस्था के दौरान आपको दिन में एक अतिरिक्त भोजन खाना जरूरी है , 

* दूध और दही छाछ पनीर जैसे दूध उत्पाद लें   इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम प्रोटीन और विटामिन होते हैं, 

* ताजा मौसमी फल और सब्जियां खाएं क्योंकि विटामिन और खनिज मिलते हैं, 

* अनाज छिलके वाले अनाज और दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं, 

*  हरा  साग लौह तत्व और फोलिक एसिड से भरपूर होता है मुट्ठीभर  लगभग 40 ग्राम मूंगफली के दाने और कम से कम 2 कप दाल से शाकाहारी लोगों के प्रोटीन से शाकाहारी लोगों के प्रोटीन की दैनिक जरूरत पूरी हो जाती है |

*  मांसाहारी लोगों के लिए मांस अंडा मुर्गी मछली प्रोटीन विटामिन और Iron तत्व के अच्छे  source hai
अपने आसपास के इलाके में उगाए जाने वाले स्थानीय मौसमी खाद्य पदार्थों सब्जियों और फलों का सेवन करें|

गर्भावस्था के दौरान आराम -

*  रात में 8 घंटे और दिन में कम से कम 2 घंटे आराम करें
*   बाय करवट लेते क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु को खून की आपूर्ति बढ़ जाती है
*  भारी सामान उठाने व कड़ी मेहनत वाले काम से बचें
*  काम में अपने ऊपर ज्यादा जोर ना दें और और दें और और कुछ काम दूसरों को सौंप दें ! 

पर्याप्त आराम से आपका शारीरिक और मानसिक तनाव दूर हो जाता है जो आपके और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए अच्छा होता है |

गर्भावस्था के दौरान खतरे के संकेत-

*  पेट में तेज दर्द
*  योनि से खून बहना
*  कमजोरी होना जल्दी थक जल्दी थक जाना और सांस 
*  फूलना
*   पैरों में सूजन होना
*   दौरे पड़ना
*   बुखार

अगर कोई  जटिलता हो तो अपने स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा  के लिए तुरंत मदद लें  नजदीकी स्त्री रोग रोग विशेषज्ञ से मिलें  ! 

स्तनपान   कब आरंभ करना चाहिए केवल स्तनपान कब तक करना चाहिए ?
*  जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु को 1 घंटे के अंदर स्तनपान कराएं, 

इससे दूध भी भी जल्दी उतरता  है
यह बच्चे की बीमारी से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है शिशु को 6 महीने तक केवल मां का दूध दे , पानी भी नहीं देना है

  परिवार को सलाह -

(Advice for Family)

गर्भवती महिला को प्रत्येक तिमाही जांच के लिए पास के स्वास्थ्य उपकेंद्र /आंगनवाड़ी अथवा  आशा से मिलना चाहिए
गर्भवती महिला को सामान्य से अधिक मात्रा अधिक मात्रा में पौष्टिक भोजन लेना चाहिए ! 

महिला को प्रति day पर्याप्त आराम जरूरी है दोपहर को 2 घंटे का अतिरिक्त आराम  ! 
जन्म के तुरंत बाद जितना जल्दी हो सके स्तनपान जरूर कराएं  ! 

सोमवार, 27 अप्रैल 2020

How to improve immune system of the body ? Immune system को कैसे बढ़ाया जाए ?



Corona वायरस / COVID 19 के आने के बाद सर्च साइटों पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला key word है-

 

 How to improve immune system of the body ?

इम्यून सिस्टम को कैसे बढ़ाया जाए ?


इस Corona Virus ने हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति सोचने के लिए मजबूर कर दिया है , नहीं तो हम अपनी जिंदगी ऐसे ही भागदौड़ वाली जी रहे थे , न खाने की चिंता, ना आराम की की हम,
आधुनिक युग में दौड़ भरी जिंदगी जीते हुए अपनी इम्यून सिस्टम को नजरअंदाज करते हुए जा रहे थे
लेकिन Corona वायरस ने हम सभी को immune system  के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर   दिया है

रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार ये खानपान की लापरवाही की वजह से होता है,कई बार नशा करने की गलत आदतों के चलते और कई बार यह जन्मजात कमजोरी की वजह से भी होता है.

अब सवाल ये उठता है कि अगर इम्यून पावर कमजोर हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? यहां ऐसे ही कुछ उपायों का जिक्र है जिन्हें आजमाकर आप एक सप्ताह के भीतर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं ,

Immune System  बढ़ाने से पहले जानेंगे -

What is immunity?


संक्रामक रोगों का निवारण करने की शरीर की शक्ति को प्रतिरक्षा(Immunity) कहते हैं।
किंतु सभी शक्तियाँ प्रतिरक्षा में नहीं गिनी जातीं। त्वचा जीवाणुओं को शरीर में प्रविष्ट नहीं होने देती।
आमाशयिक रस का अम्ल जीवाणुओं को नष्ट कर देता है, किंतु यह प्रतिरक्षा के अंतर्गत नहीं आता।
ये शरीर की रक्षा के प्राकृतिक साधन हैं।
प्रतिरक्षा से अर्थ है ब्राह्य प्रोटीनों को रक्त में उपस्थित विशिष्ट वस्तुओं द्वारा नष्ट कर डालने की शक्ति। जीवाणु जो शरीर में प्रविष्ट होते हैं, उनके शरीरों के घुलने से प्रोटीन उत्पन्न होते हैं। उनकी नष्ट कर देने की शक्ति रक्त में होती है। इस क्रिया का रूप रासायनिक तथा भौतिक होता है, यद्यपि यह शक्ति कुछ सीमा तक प्राकृतिक होती है, किंतु वह विशेषकर उपार्जित (aquired) होती है और जीवाणुओं और वाइरसों (viruses) के शरीर में प्रविष्ट होने से शरीर में इन कारणों को नष्ट करनेवाली वस्तुएँ उत्पन्न हो जाती हैं। यह विशिष्ट (specific) प्रतिरक्षा कहलाती है। इन रोगों के कीटाणुओं को प्राणी के शरीर में प्रविष्ट किया जाता है, तो उससे शरीर उनका नाश करने वाली वस्तुएँ स्वयं बनाता है। यह सक्रिय रोग क्षमता है। इसको उत्पन्न करने के लिये जिस वस्तु को शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है वह वैक्सीन कहलाती है।
जब एक जंतु के शरीर में वैक्सीन प्रविष्ट करने से सक्रिय क्षमता उत्पन्न हो जाती है, तो उसके शरीर से थोड़ा रक्त निकालकर, उसके सीरम को पृथक्‌ करके, उसको दूसरे जंतु के शरीर में प्रविष्ट करने से निष्क्रिय क्षमता उत्पन्न होती है। अर्थात्‌ एक जंतु का शरीर उन जीवाणुनाशक वस्तुओं को उत्पन्न करता है और इन प्रतिरक्षक वस्तुओं को दूसरे जंतु के शरीर में प्रविष्ट करके उसको रोगनाशक शक्ति से संपन्न कर दिया जाता है। यह हुई निष्क्रिय प्रतिरक्षा।
चिकित्सा में इसका बहुत प्रयोग किया जाता है। डिफ्थीरिया, टिटैनस आदि रोगों की इसी प्रकार तैयार किए गए ऐंटीटॉक्सिक सीरम से चिकित्सा की जाती है।

खराब इम्यूनिटी के लक्षण -


बार-बार संक्रमण होना या ऐलर्जी -

*  अगर आपको लगता है कि आप दूसरों की अपेक्षा बार-बार बीमार होते हैं, जुकाम की शिकायत रहती है, खांसी, गला खराब होना या स्किन रैशेज जैसी समस्या रहती है तो बहुत पॉसिबल है कि यह आपके इम्यून सिस्टम की वजह से हो। कैंडिडा टेस्ट का पॉजिटिव होना, बार-बार यूटीआई, डायरिया, मसूड़ों में सूजन, मुंह में छाले वगैरह भी खराब इम्यूनिटी के लक्षण हैं। 

*  कुछ लोग जरा सा मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं। यह शरीर का तापमान कम होने से हो सकता है।   मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए नॉर्मल ऑरल बॉडी टेंपरेचर 36.3 डिग्री से. से नीचे नहीं होना चाहिए। क्योंकि सर्दी के वायरस 33 डिग्री पर सर्वाइव करते हैं।

*  रोजाना एक्सर्साइज करने से आप अपनी बॉडी का तापमान और इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं। साथ ही गर्माहट पैदा करने वाले मसाले जैसे लहसुन अदरक, दालचीनी लौंग वगैरह भी बेहद काम के हैं।

इम्यून सिस्टम को कैसे बढ़ाया जाए-


1.  संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है.

2. विटमिन डी की कमी 
विटमिन डी इम्यूनिटी को बढ़ाता है और ज्यादातर लोगों में इसकी कमी होती है। अगर आपकी ब्लड रिपोर्ट में विटमिन डी की कमी है तो आपको इसका लेवेल सही करने की हर कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा लगातार थकान, आलस या ऐसे घाव जो लंबे वक्त तक न भरें, नींद न आना, डिप्रेशन और डार्क सर्कल भी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता की निशानी है।


बच्‍चों के आहार में कुछ चीजों को शामिल कर आप उनकी इम्युनिटी को बढ़ा सकते हैं।  

 अगर आपका बच्‍चा कमजोर है और जल्‍दी बीमार पड़ जाता है तो आपको उसकी डायट में यहां बताई गई चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए।

3.  पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक, ब्रोकली, पार्सले, केल जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां संक्रमण से लड़ने और बचाने में मदद करती है। इनमें विटामिन ए, सी और के, कैल्शियम, आयरन, मैग्‍नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्‍च और माइक्रो न्‍यूट्रिएंट्स होते हैं।
 ये बीटा कैरोटीन जैसे एंटीऑक्‍सीडेंट से भी युक्‍त होती हैं जो कि इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

4.  संतरा, नींबू और अमरूद जैसे खट्टे फलों में उच्‍च मात्रा में विटामिन-सी होता है एवं यह एंटीऑक्‍सीडेंट से भी युक्‍त होता है।
 इसके अलावा सिट्रस फल आयरन जैसे पोषक तत्‍वों को अवशोशित करने में भी शरीर की मदद करते हैं और इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाते हैं।


5.  दालों में प्रोटीन, फाइबर, फोलेट, आयरन, कैल्शियम, मैग्‍नीशियम, जिंक और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है। प्रोटीन पाने का ये सबसे आसान तरीका है।
 दालों में फाइटोकेमिल भी होते हैं जो गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

6.  बादाम, अखरोट, पिस्‍ता, काूज और मूंगफली एवं बीज जैसे कि कद्दू के बीज, अलसी के बीज, चिया सीड्स और तिल के बीज प्रोटीन, हैल्‍दी फैट, फाइबर, विटामिन और खनिज पदार्थों को अच्‍छा स्रोत होते हैं।
 ये विटामिन ई से भरपूर होते हैं जो कि एक महत्‍वपूर्ण एंटीऑक्‍सीडेंट है और इम्‍यूनिटी बढ़ाता है।

7.  हल्‍दी में करक्‍यूमिन नामक तत्‍व होता है जिसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं। सदियों से बीमारियों से लड़ने और शरीर को मजबूत बनाने के लिए हल्‍दी का इस्‍तेमाल किया जाता रहा है।

सभी खाद्य पदार्थों को खा सकते हैं किंतु आप वही खाएं जिससे आप   का Digestion   आसानी से हो सके,
 धन्यवाद,


मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

What is Balanced Nutrition & Micro nutrition?



कुपोषण का अर्थ है 'पोषण की कमी' 


यदि कोई बच्चा कुपोषित है तो इसका अर्थ है कि उसकी शारीरिक एवं व मानसिक वृद्धि प्रभावित हो रही है,

भारत में कुपोषण की समस्या बहुत ही गंभीर है और  उत्तर प्रदेश में 10 में 5 बच्चे कुपोषण का शिकार है इसी प्रकार लगभग भारत के सभी राज्यों का आंकड़ा यही है

 कुपोषण केवल बच्चों में ही नहीं , गर्भवती, धात्री,  महिला पुरुष सभी में व्याप्त है,


 वयस्कों  में यह मोटापा व पतलापन के रूप में दिखाई देता है
पतला दिखना या शारीरिक रूप से कमजोर दिखना ,  मे तो कुपोषण साफ दिखता है,

 लेकिन मोटापा भी कुपोषण का ही एक रूप है|

कुपोषण के कारण :-


1. गरीबी ,बेरोजगारी , सरकारी रणनीतियां
    ( आर्थिक संगठनात्मक एवं मानव संसाधन)
2. भोजन की  अपर्याप्त उपलब्धता
3. बच्चों और महिलाओं की अपर्याप्त देखभाल
4.  अस्वस्थ वातावरण
5. अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं



 कुपोषण के परिणाम :-


अगर बच्चा कुपोषित है तो यह क्षमता क्षीण हो जाती है-

1. स्वस्थ शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है
2.  बच्चा बार-बार  बीमार पड़ता है,  इस कारण death की संभावना भी बढ़ जाती है
3. शारीरिक व बौद्धिक विकास में कमी आ जाती है
4. वयस्क होने पर कार्य क्षमता एवं कमाने की क्षमता में भी कमी आ सकती है
5.  पढ़ाई में पिछड़ सकता है
6. सुस्त शरीर
7. कमजोर वयस्क



 कुपोषण का शिकार कौन अधिक हो सकता है? ? 

1. गर्भवती माताएं
2.  कम वजन के नवजात शिशु व नवजात
3.  किशोरी
4.  5 वर्ष  तक की आयु के बच्चे

 यह सब जानने के बाद-
 हम जानेंगे

What is Balanced Nutrition? 


Ensuring we get a daily supply of a daily supply of get a daily supply of of the adequate amount of nutrients from our diet to to stay healthy.


संतुलित पोषण क्या है ? 


संतुलित भोजन वह है जो हमारे खाने में से जरूरी पोषक तत्वों को बराबर मात्रा में हमारे शरीर की जरूरतों के आधार पर प्रदान करता है |

 न्यूट्रिशन  हर रोज जरूरी है
/ Nutrients we need everyday. 

1. Protein
2.Minerals
3.Carbohydrate
4.Essential fat
5.Water
6.Fibre
6.Herbs etc


हम सभी को न्यूट्रिशन की क्या जरूरत है? 

Why Nutrition?? 


 यह मदद करता है...

1. वृद्धि व विकास व रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है
2. पौष्टिकता की घटक को पूरी करता है
3. Nervous system को मजबूत करता है
4. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
5. जल्दी बुढ़ापा नहीं आने देता है
6. तनावपूर्ण ,जीवनशैली , खाने की आदत आदत को ठीक करता है
7. रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है




अभी तक हमने चर्चा किए हैं

कुपोषण क्या है
न्यूट्रेशन की क्यों जरूरत जरूरत है

अब हम स्टार्ट करेंगे गर्भावस्था से लेकर बड़े होने तक के   सभी स्टेज में   पोषण की कितनी जरूरत है

गर्भवती एवं धात्री महिला का पोषण-


गर्भावस्था में उचित पोषण से महिला स्वस्थ रहती है ,
एक स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ शिशु को जन्म देती है  |
गर्भवती महिलाओं धात्री माताओं और बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ बेहतर और नियमित पोषण सेवाएं भी अति आवश्यक है , गर्भावस्था के दौरान अगर महिला कुपोषित हो तो कुपोषित शिशु को जन्म देने की संभावना बहुत बढ़ जाती है कुपोषण के कारण कुपोषित शिशुओं की मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है गर्भावस्था के दौरान और जन्म के पश्चात 2 वर्ष तक उचित पोषण सेवाएं और  न्यूट्रीशन ना मिलने से कुपोषण के कुचक्र में फंसने का खतरा बना रहता है |

Mother पोषण



मात्र पोषण स्वस्थ्य बचपन का आधार है,


2 साल तक के बच्चों में व्याप्त कुपोषण का लगभग 50% मां के गर्भ में शिशु विकास से जुड़ा होता है
मां को कुपोषण किन कारणों से हो सकता है

*  वजन का 40 केजी एवं लंबाई 1 फुट 5 सेंटीमीटर से कम
   गर्भवती एवं धात्री महिलाओं का अपर्याप्त भोजन |

*  एनीमिया खून की कमी व   micro nutrient पोषक तत्वों की कमी |

*  दो बच्चों के मध्य कम अंतराल अंतराल तथा बार बार गर्भधारण गर्भधारण|

*  साफ सफाई संबंधी व्यवहार में कमी |

*  समुदाय आधारित परंपराएं मान्यताएं व व्यवहार महिलाओं के खानपान एवं खानपान एवं खानपान एवं एवं देखभाल संबंधी व्यवहार|

गर्भवती एवं धात्री महिला को पोषण के बारे में किन किन के बारे में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?


गर्भावस्था के दौरान एक अतिरिक्त आहार लें |

थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन ग्रहण करें कम से कम 3 कम 3 3 बार और पहले की अपेक्षा डेढ़ गुना मात्रा में भोजन मात्रा में भोजन करें|

और साथ ही 2 बार नाश्ता भी करें ,,

इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को उचित विकास होगा धात्री महिला पहले से दुगनी मात्रा में  आहार ले|

गर्भावस्था में आयरन की गोली का सेवन

पहले तिमाही के बाद एक गोली के दर से 180 गोली आयरन के ले|
एनीमिया (हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम होने )पर  2 गोली   प्रतिदिन
  आयरन की गोली जहां तक संभव हो खाना खाने के 1 घंटे बाद या रात में में ले,
ऐसा करने से  Iron tablet प्रभाव जैसे उल्टी आना, जी मिचलाना ,चक्कर आना , सर भारी होना इत्यादि से बचा जा सकता है|
गर्भावस्था के दौरान  आयरन की गोली का सेवन बच्चों के बढ़ने और उनके मस्तिष्क के विकास में मदद करता है गर्भावस्था में आयरन की कमी होने पर मां को एनीमिया हो सकता है,

 जोकि मां, मां व बच्चों दोनों को खतरे की संभावना बढ़ाता है एनीमिया से कम वजन का शिशु तथा प्रसव पश्चात मां को अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना बढ़ जाती है,

गंभीर एनीमिया होने की स्थिति में महिला को डॉक्टर की सलाह पर आयन का इंजेक्शन का इंजेक्शन या खून चढ़ाया जाता है|

गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के लक्षण


*  शारीरिक क्षमता और कार्यक्षमता का कम होना

*  पैरों में ऐंठन और खिंचाव

*  आमतौर पर दिल का धड़कन बढ़ना

*   सुस्ती - थकान

6 माह से 5 वर्ष से 5 वर्ष के बच्चों में एनीमिया के लक्षण


1.कमजोर मानसिक विकास
2. पढ़ाई और खेल में ध्यान कम लगना
3. शारीरिक संचालन क्षमता का कम होना
4. शीघ्र थकान
5. सांस फूलना
6. चक्कर आना
7.  बार-बार बीमार पड़ना
8. व्यवहार संबंधी समस्याएं

**   6 माह से 5 साल  तक के सभी बच्चों को साल में 100 दिन के लिए हर हफ्ते में दो बार 1ml आयरन सिरप देना

गर्भावस्था में वजन वृद्धि को मापे मापे

गर्भावस्था के दौरान 9 से 11  किलोग्राम वजन बढ़ता है ,
चौथे महीने से हर महीने औसतन 1.5 किलोग्राम से 2 किलोग्राम वजन बढ़ता है|

**   सूश्वम पोषक तत्व आयरन, विटामिन ए ,आयोडीन  micro nutrients पोषक है जो मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और एनीमिया जैसी बीमारी से बचाव करता है

इनकी शरीर में काफी कम मात्रा में आवश्यकता होती है इसलिए this is called micro nutrients.  बाल्यावस्था में शारीरिक व मानसिक विकास तेजी से होता है इसलिए बच्चों को इसकी अधिक आवश्यकता होती है,

**    विटामिन ए  micro nutrient  तत्व है
जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
 बच्चों में निमोनिया खसरा मलेरिया डायरिया जैसी बीमारियों से बचाता है ,
इसके सामान्य स्रोत हैं पीली केसरी या लाल रंग  की सब्जियां व फल कुछ हरे पत्ते वाली सब्जियां, अंडे का पीला हिस्सा,
दूध इत्यादि

**  आयोडीन थायराइड ग्लैंड को सही कार्य करने एवं विकास में सहायक होता है,
शरीर की मानसिक और शारीरिक विकास के लिए इसका  नियमित रूप से सेवन जरूरी है
 गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए अति आवश्यक है इसकी कमी होने से बच्चे को गंभीर मंदबुद्धि हो जाती है
 शरीर में आयोडीन की रोजाना 150 माइक्रोग्राम मात्रा में आवश्यकता होती है,
रोजाना आयोडीन युक्त नमक  सेवन करना इसका एक स्रोत है

**   मां का पहला गाढ़ा दूध विटामिन ए का प्रमुख स्रोत है साथ ही 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से बच्चों को विटामिन ए की कमी से बचाया जा सकता है,