कुपोषण का अर्थ है 'पोषण की कमी'
यदि कोई बच्चा कुपोषित है तो इसका अर्थ है कि उसकी शारीरिक एवं व मानसिक वृद्धि प्रभावित हो रही है,
भारत में कुपोषण की समस्या बहुत ही गंभीर है और उत्तर प्रदेश में 10 में 5 बच्चे कुपोषण का शिकार है इसी प्रकार लगभग भारत के सभी राज्यों का आंकड़ा यही है
कुपोषण केवल बच्चों में ही नहीं , गर्भवती, धात्री, महिला पुरुष सभी में व्याप्त है,
वयस्कों में यह मोटापा व पतलापन के रूप में दिखाई देता है
पतला दिखना या शारीरिक रूप से कमजोर दिखना , मे तो कुपोषण साफ दिखता है,
लेकिन मोटापा भी कुपोषण का ही एक रूप है|
कुपोषण के कारण :-
1. गरीबी ,बेरोजगारी , सरकारी रणनीतियां
( आर्थिक संगठनात्मक एवं मानव संसाधन)
2. भोजन की अपर्याप्त उपलब्धता
3. बच्चों और महिलाओं की अपर्याप्त देखभाल
4. अस्वस्थ वातावरण
5. अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं
कुपोषण के परिणाम :-
अगर बच्चा कुपोषित है तो यह क्षमता क्षीण हो जाती है-
1. स्वस्थ शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है
2. बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है, इस कारण death की संभावना भी बढ़ जाती है
3. शारीरिक व बौद्धिक विकास में कमी आ जाती है
4. वयस्क होने पर कार्य क्षमता एवं कमाने की क्षमता में भी कमी आ सकती है
5. पढ़ाई में पिछड़ सकता है
6. सुस्त शरीर
7. कमजोर वयस्क
कुपोषण का शिकार कौन अधिक हो सकता है? ?
1. गर्भवती माताएं
2. कम वजन के नवजात शिशु व नवजात
3. किशोरी
4. 5 वर्ष तक की आयु के बच्चे
यह सब जानने के बाद-
हम जानेंगे
What is Balanced Nutrition?
Ensuring we get a daily supply of a daily supply of get a daily supply of of the adequate amount of nutrients from our diet to to stay healthy.
संतुलित पोषण क्या है ?
संतुलित भोजन वह है जो हमारे खाने में से जरूरी पोषक तत्वों को बराबर मात्रा में हमारे शरीर की जरूरतों के आधार पर प्रदान करता है |
न्यूट्रिशन हर रोज जरूरी है
/ Nutrients we need everyday.
1. Protein
2.Minerals
3.Carbohydrate
4.Essential fat
5.Water
6.Fibre
6.Herbs etc
हम सभी को न्यूट्रिशन की क्या जरूरत है?
Why Nutrition??
यह मदद करता है...
1. वृद्धि व विकास व रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है
2. पौष्टिकता की घटक को पूरी करता है
3. Nervous system को मजबूत करता है
4. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
5. जल्दी बुढ़ापा नहीं आने देता है
6. तनावपूर्ण ,जीवनशैली , खाने की आदत आदत को ठीक करता है
7. रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है
अभी तक हमने चर्चा किए हैं
कुपोषण क्या है
न्यूट्रेशन की क्यों जरूरत जरूरत है
अब हम स्टार्ट करेंगे गर्भावस्था से लेकर बड़े होने तक के सभी स्टेज में पोषण की कितनी जरूरत है
कुपोषण क्या है
न्यूट्रेशन की क्यों जरूरत जरूरत है
अब हम स्टार्ट करेंगे गर्भावस्था से लेकर बड़े होने तक के सभी स्टेज में पोषण की कितनी जरूरत है
गर्भवती एवं धात्री महिला का पोषण-
गर्भावस्था में उचित पोषण से महिला स्वस्थ रहती है ,
एक स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ शिशु को जन्म देती है |
गर्भवती महिलाओं धात्री माताओं और बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ बेहतर और नियमित पोषण सेवाएं भी अति आवश्यक है , गर्भावस्था के दौरान अगर महिला कुपोषित हो तो कुपोषित शिशु को जन्म देने की संभावना बहुत बढ़ जाती है कुपोषण के कारण कुपोषित शिशुओं की मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है गर्भावस्था के दौरान और जन्म के पश्चात 2 वर्ष तक उचित पोषण सेवाएं और न्यूट्रीशन ना मिलने से कुपोषण के कुचक्र में फंसने का खतरा बना रहता है |
2 साल तक के बच्चों में व्याप्त कुपोषण का लगभग 50% मां के गर्भ में शिशु विकास से जुड़ा होता है
मां को कुपोषण किन कारणों से हो सकता है
* वजन का 40 केजी एवं लंबाई 1 फुट 5 सेंटीमीटर से कम
एक स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ शिशु को जन्म देती है |
गर्भवती महिलाओं धात्री माताओं और बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ बेहतर और नियमित पोषण सेवाएं भी अति आवश्यक है , गर्भावस्था के दौरान अगर महिला कुपोषित हो तो कुपोषित शिशु को जन्म देने की संभावना बहुत बढ़ जाती है कुपोषण के कारण कुपोषित शिशुओं की मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है गर्भावस्था के दौरान और जन्म के पश्चात 2 वर्ष तक उचित पोषण सेवाएं और न्यूट्रीशन ना मिलने से कुपोषण के कुचक्र में फंसने का खतरा बना रहता है |
Mother पोषण
मात्र पोषण स्वस्थ्य बचपन का आधार है,
2 साल तक के बच्चों में व्याप्त कुपोषण का लगभग 50% मां के गर्भ में शिशु विकास से जुड़ा होता है
मां को कुपोषण किन कारणों से हो सकता है
* वजन का 40 केजी एवं लंबाई 1 फुट 5 सेंटीमीटर से कम
गर्भवती एवं धात्री महिलाओं का अपर्याप्त भोजन |
* एनीमिया खून की कमी व micro nutrient पोषक तत्वों की कमी |
* दो बच्चों के मध्य कम अंतराल अंतराल तथा बार बार गर्भधारण गर्भधारण|
* साफ सफाई संबंधी व्यवहार में कमी |
* समुदाय आधारित परंपराएं मान्यताएं व व्यवहार महिलाओं के खानपान एवं खानपान एवं खानपान एवं एवं देखभाल संबंधी व्यवहार|
* एनीमिया खून की कमी व micro nutrient पोषक तत्वों की कमी |
* दो बच्चों के मध्य कम अंतराल अंतराल तथा बार बार गर्भधारण गर्भधारण|
* साफ सफाई संबंधी व्यवहार में कमी |
* समुदाय आधारित परंपराएं मान्यताएं व व्यवहार महिलाओं के खानपान एवं खानपान एवं खानपान एवं एवं देखभाल संबंधी व्यवहार|
गर्भवती एवं धात्री महिला को पोषण के बारे में किन किन के बारे में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
गर्भावस्था के दौरान एक अतिरिक्त आहार लें |
थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन ग्रहण करें कम से कम 3 कम 3 3 बार और पहले की अपेक्षा डेढ़ गुना मात्रा में भोजन मात्रा में भोजन करें|
और साथ ही 2 बार नाश्ता भी करें ,,
इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को उचित विकास होगा धात्री महिला पहले से दुगनी मात्रा में आहार ले|
गर्भावस्था में आयरन की गोली का सेवन
पहले तिमाही के बाद एक गोली के दर से 180 गोली आयरन के ले|एनीमिया (हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम होने )पर 2 गोली प्रतिदिन
आयरन की गोली जहां तक संभव हो खाना खाने के 1 घंटे बाद या रात में में ले,
ऐसा करने से Iron tablet प्रभाव जैसे उल्टी आना, जी मिचलाना ,चक्कर आना , सर भारी होना इत्यादि से बचा जा सकता है|
गर्भावस्था के दौरान आयरन की गोली का सेवन बच्चों के बढ़ने और उनके मस्तिष्क के विकास में मदद करता है गर्भावस्था में आयरन की कमी होने पर मां को एनीमिया हो सकता है,
जोकि मां, मां व बच्चों दोनों को खतरे की संभावना बढ़ाता है एनीमिया से कम वजन का शिशु तथा प्रसव पश्चात मां को अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना बढ़ जाती है,
गंभीर एनीमिया होने की स्थिति में महिला को डॉक्टर की सलाह पर आयन का इंजेक्शन का इंजेक्शन या खून चढ़ाया जाता है|
गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के लक्षण
* शारीरिक क्षमता और कार्यक्षमता का कम होना
* पैरों में ऐंठन और खिंचाव
* आमतौर पर दिल का धड़कन बढ़ना
* सुस्ती - थकान
6 माह से 5 वर्ष से 5 वर्ष के बच्चों में एनीमिया के लक्षण
1.कमजोर मानसिक विकास
2. पढ़ाई और खेल में ध्यान कम लगना
3. शारीरिक संचालन क्षमता का कम होना
4. शीघ्र थकान
5. सांस फूलना
6. चक्कर आना
7. बार-बार बीमार पड़ना
8. व्यवहार संबंधी समस्याएं
** 6 माह से 5 साल तक के सभी बच्चों को साल में 100 दिन के लिए हर हफ्ते में दो बार 1ml आयरन सिरप देना
गर्भावस्था में वजन वृद्धि को मापे मापे
गर्भावस्था के दौरान 9 से 11 किलोग्राम वजन बढ़ता है ,
चौथे महीने से हर महीने औसतन 1.5 किलोग्राम से 2 किलोग्राम वजन बढ़ता है|
** सूश्वम पोषक तत्व आयरन, विटामिन ए ,आयोडीन micro nutrients पोषक है जो मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और एनीमिया जैसी बीमारी से बचाव करता है
इनकी शरीर में काफी कम मात्रा में आवश्यकता होती है इसलिए this is called micro nutrients. बाल्यावस्था में शारीरिक व मानसिक विकास तेजी से होता है इसलिए बच्चों को इसकी अधिक आवश्यकता होती है,
** विटामिन ए micro nutrient तत्व है
जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
बच्चों में निमोनिया खसरा मलेरिया डायरिया जैसी बीमारियों से बचाता है ,
इसके सामान्य स्रोत हैं पीली केसरी या लाल रंग की सब्जियां व फल कुछ हरे पत्ते वाली सब्जियां, अंडे का पीला हिस्सा,
दूध इत्यादि
** आयोडीन थायराइड ग्लैंड को सही कार्य करने एवं विकास में सहायक होता है,
शरीर की मानसिक और शारीरिक विकास के लिए इसका नियमित रूप से सेवन जरूरी है
गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए अति आवश्यक है इसकी कमी होने से बच्चे को गंभीर मंदबुद्धि हो जाती है
शरीर में आयोडीन की रोजाना 150 माइक्रोग्राम मात्रा में आवश्यकता होती है,
रोजाना आयोडीन युक्त नमक सेवन करना इसका एक स्रोत है
** मां का पहला गाढ़ा दूध विटामिन ए का प्रमुख स्रोत है साथ ही 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से बच्चों को विटामिन ए की कमी से बचाया जा सकता है,




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