Viagra for Female

सोमवार, 10 अगस्त 2020

स्वस्थ भोजन की थाली(Hindi) Current NUTRITIONAL SCENARIO 2020

 आइए जानते हैं  पोषण एवं कुपोषण से क्यों परेशान है

Nutrition क्या है   ?

( Malnutrition ) कुपोषण क्या है   ? 


आज के भागदौड़ वाली जिंदगी में स्वास्थ्य के प्रति हम कितनी लापरवाह होते जा रहे हैं की अपने बारे में सोचते/  सोचती भी नहीं , हम अपने बॉडी के आधार को ही भूलने लगे हैं  इसको हम मशीनों की तरह Use करने लगे हैं लेकिन यह machine नहीं है यह शरीर है यह तेल (Oil) से नहीं चलती ,
यह चलती है - प्रोटीन, विटामिन ,मिनरल्स ,वाटर और बहुत से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स , इसके बारे में सोचने के लिए हमारे पास समय ही नहीं है हम सिर्फ पैसे ,बाहरी सुख के लिए दौड़ रहे हैं जो सुख शरीर को देना है वह  नहीं दे रहे हैं  शरीर को कैसे एनर्जी से परिपूर्ण रखे, उसको कोई बीमारी ना लगे, इसके बारे में हम ध्यान ही नहीं दे रहे हैं ,
लेकिन यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि केवल हम भारतीय ही इस से पीड़ित हैं पूरा विश्व पीड़ित है. जिसका नाम है कुपोषण ,लैक आफ न्यूट्रिशन .(Lack of Nutrition)

 हम इस वेबसाइट  /Blogs में जानेंगे -

1.  आज के परिवेश में क्या खाना चाहिए? 
2. कुपोषण से कैसे बचें
3. कुपोषण से होने वाले रोगों के बारे में जानकारी
4. संतुलित आहार हर उम्र के लोगों के लिए /  डाइट प्लान
5. मोटापा कैसे दूर भगाएं / वजन घटाना या बढ़ाना Lose weight or Gain
6. व्यायाम या एक्सरसाइज
7. मानसिक स्थिति या स्ट्रेस से कैसे बचें
8. रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाएं
9. एक्यूप्रेशर की सहायता से रोगों को दूर करना.
10 योगा एवं मेडिटेशन.

पोषण की जरूरत हर वर्ग में अलग होती है जैसे कि - गर्भावस्था के दौरान महिला का पोषण ,
और  जन्मे बालक का पोषण,
बढ़ते  बालक का पोषण,
खिलाड़ी के लिए पोषण ,
मजदूर और   वृद्धा अवस्था, घर में रहने वाले व्यक्तियों के लिए अलग-अलग पोषण की जरूरत होती है!

 हमारे भारतीय समाज में भोजन में पोषण Nutrition तो होता है लेकिन वह हर उम्र वर्ग के हिसाब से ठीक नहीं होता है
 भारतीय घरों में जो   रसोई बनती है वह सभी वर्ग के लिए पोषण समान होता है लेकिन हमको जो चाहिए वह अलग अनुपात में चाहिए इसलिए ,यहां पर पोषण  से जुड़े मामले ज्यादा पाए जाते हैं
 पोषण की कमी से बच्चों के दिमाग का विकास , शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है!  और यह बहुत आसानी से रोगों के शिकार हो जाते हैं

पोषण की कमी से बच्चों के दिमाग का विकास , शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है!  और यह बहुत आसानी से रोगों के शिकार हो जाते हैं
  प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग - मेरेसमस , क्वासरकोर
 जैसे रोगों से भारतीय बच्चे पीड़ित हो रहे हैं !
 कुछ जगह यह यह दिक्कत गरीबी व भुखमरी की वजह से है
, लेकिन एक वर्ग है जहां पर हर सुविधा उपलब्ध होते हुए भी वह फास्ट फूड खाकर अपने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ  खिलवाड़ कर रहे हैं , वे नहीं जानते कि उनका बच्चा जो फास्टफूड खा रहा रहा है उसमें केवल कार्बोहाइड्रेट की अधिकता है ना कि प्रोटीन, विटामिंस की और हमारे शरीर को जो चाहिए वह संतुलित  आहार चाहिए,
 असंतुलित भोजन का एक परिणाम भारत में दिखने लगा है वह है बच्चों में मोटापा या उनके मानसिक विकास का कम होना!



किंतु भोजन  में पोषण की कमी का असर युवा, बुजुर्ग, महिला ,पुरुष ,सभी वर्ग में दिखने लगा है -
1.जल्दी थक जाना
2.शारीरिक उर्जा की कमी की कमी
3.ऑस्टियोपोरोसिस, Osteoporosis
4. प्रजनन में दिक्कत महिला या पुरुष दोनों में,( Infertility)
5. रतौंधी ( Night blindness)
6. बालों का गिरना( Hair Fall) ,
7. असमय सफेद होना
8. पैरों में दर्द व जलन
इत्यादि
बहुत से लोग इस रोग से पीड़ित होंगे जिसका मुख्य वजह है
शरीर को सही पोषण ना मिलना  ,
शरीर का  ठीक से काम ना करना यह सभी लक्षण असंतुलित भोजन की वजह से है और अगर हम सभी जल्दी इसको नहीं सचेते तो आने वाले दिनों में परिणाम बहुत ही भयावह होगा!


अगर व्यक्ति सही पोषण अपने शरीर को देने लगे तो वह 100   वर्ष तक जी सकता है लेकिन हमारे वातावरण में परिवर्तन और हमारे भोजन में परिवर्तन की वजह से हमारी उम्र 70 के पास आकर रह गई है !

हमारे भोजन में जो परिवर्तन  हुआ है ,
वह 3 स्टेप में है-

1.  भोजन को पैदा करने का तरीका या कल्टीवेशन
2.  भोजन का स्टोरेज का तरीका
3.   भोजन का पकाने का तरीका

 यह तीनों स्टेप हमारे भोजन से पोषण को छीन लिया है

भोजन को पैदा करने का तरीका-


अब आपका यह प्रश्न होगा कि पोषण को कैसे छीन लिया है -
 तो आप जानिये की भोजन जो पैदा होता है किसान द्वारा , वहां पर बहुत से पेस्टिसाइड एवं खाद जैसे यूरिया , डीएपी का प्रयोग होता है जिस से ऊपज तो बढ़ जाती है लेकिन जाने अनजाने में इसकी   मात्रा  हमारे भोजन में पहुंच जाता है,

भोजन का स्टोरेज का तरीका-


आप सभी जानते हैं कि जिस प्रकार से हम भोजन को स्टोर कर रहे हैं उसमें भी गेमैक्सीन पाउडर या बहुत अलग से केमिकल का   प्रयोग करते हैं जिससे उसमें कीड़े या फफूंदी  ना लगे,
 और कुछ भोजन जैसी सब्जियां, फल  का हमारे तक पहुंचने में 2 से 4 दिन लग जाते हैं इसमें इनकी गुणवत्ता में कमी आ जाती है,
 और इसके बाद हम सभी फल सब्जियों को रेफ्रिजरेटर में रखकर उस में पाए जाने वाले विटामिंस की गुणवत्ता को कम कर देते हैं
जो फल सब्जी हमने खाया उसका प्रचुर मात्रा में उपयुक्त विटामिंस का उपयोग नहीं कर पाए!

भोजन का पकाने का तरीका-


 हम सभी जानते हैं कि जो भोजन हम पका रहे
गैस की नीली फलेम पर  जिसका तापमान बहुत ही अधिक होता है उस तापमान पर   विटामिंस Vitamin के गुण खत्म हो जाते हैं
उसके अलावा हम सभी प्रेशर कुकर व जो रोटियां सेकते हैं, डायरेक्ट नीली फलेम के कांटेक्ट पर सेकाई करते हैं ,  इन वजहों से भी भोजन की गुणवत्ता में कमी आ जाती है!
हम सभी अपने हिसाब से तो अच्छी क्वालिटी का भोजन करते हैं लेकिन यह पद्धतियां उनकी गुणवत्ता को कम कर देती है!

पोषण को जानने से पहले हम पहले देखेंगे

कुपोषण क्या है   ? 

 


इतना सब सीखने के बाद हम अगले ब्लॉग में जानेंगे कुपोषण के कारण और न्यूट्रिशन...
आप सभी से मुलाकात होगी नेक्स्ट ब्लॉग में तब तक के लिए नमस्कार ,
धन्यवाद