Corona वायरस / COVID 19 के आने के बाद सर्च साइटों पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला key word है-
How to improve immune system of the body ?
इम्यून सिस्टम को कैसे बढ़ाया जाए ?
इस Corona Virus ने हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति सोचने के लिए मजबूर कर दिया है , नहीं तो हम अपनी जिंदगी ऐसे ही भागदौड़ वाली जी रहे थे , न खाने की चिंता, ना आराम की की हम,
आधुनिक युग में दौड़ भरी जिंदगी जीते हुए अपनी इम्यून सिस्टम को नजरअंदाज करते हुए जा रहे थे
लेकिन Corona वायरस ने हम सभी को immune system के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दिया है
रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार ये खानपान की लापरवाही की वजह से होता है,कई बार नशा करने की गलत आदतों के चलते और कई बार यह जन्मजात कमजोरी की वजह से भी होता है.
अब सवाल ये उठता है कि अगर इम्यून पावर कमजोर हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? यहां ऐसे ही कुछ उपायों का जिक्र है जिन्हें आजमाकर आप एक सप्ताह के भीतर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं ,
Immune System बढ़ाने से पहले जानेंगे -
What is immunity?
संक्रामक रोगों का निवारण करने की शरीर की शक्ति को प्रतिरक्षा(Immunity) कहते हैं।
किंतु सभी शक्तियाँ प्रतिरक्षा में नहीं गिनी जातीं। त्वचा जीवाणुओं को शरीर में प्रविष्ट नहीं होने देती।
आमाशयिक रस का अम्ल जीवाणुओं को नष्ट कर देता है, किंतु यह प्रतिरक्षा के अंतर्गत नहीं आता।
ये शरीर की रक्षा के प्राकृतिक साधन हैं।
प्रतिरक्षा से अर्थ है ब्राह्य प्रोटीनों को रक्त में उपस्थित विशिष्ट वस्तुओं द्वारा नष्ट कर डालने की शक्ति। जीवाणु जो शरीर में प्रविष्ट होते हैं, उनके शरीरों के घुलने से प्रोटीन उत्पन्न होते हैं। उनकी नष्ट कर देने की शक्ति रक्त में होती है। इस क्रिया का रूप रासायनिक तथा भौतिक होता है, यद्यपि यह शक्ति कुछ सीमा तक प्राकृतिक होती है, किंतु वह विशेषकर उपार्जित (aquired) होती है और जीवाणुओं और वाइरसों (viruses) के शरीर में प्रविष्ट होने से शरीर में इन कारणों को नष्ट करनेवाली वस्तुएँ उत्पन्न हो जाती हैं। यह विशिष्ट (specific) प्रतिरक्षा कहलाती है। इन रोगों के कीटाणुओं को प्राणी के शरीर में प्रविष्ट किया जाता है, तो उससे शरीर उनका नाश करने वाली वस्तुएँ स्वयं बनाता है। यह सक्रिय रोग क्षमता है। इसको उत्पन्न करने के लिये जिस वस्तु को शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है वह वैक्सीन कहलाती है।
जब एक जंतु के शरीर में वैक्सीन प्रविष्ट करने से सक्रिय क्षमता उत्पन्न हो जाती है, तो उसके शरीर से थोड़ा रक्त निकालकर, उसके सीरम को पृथक् करके, उसको दूसरे जंतु के शरीर में प्रविष्ट करने से निष्क्रिय क्षमता उत्पन्न होती है। अर्थात् एक जंतु का शरीर उन जीवाणुनाशक वस्तुओं को उत्पन्न करता है और इन प्रतिरक्षक वस्तुओं को दूसरे जंतु के शरीर में प्रविष्ट करके उसको रोगनाशक शक्ति से संपन्न कर दिया जाता है। यह हुई निष्क्रिय प्रतिरक्षा।
चिकित्सा में इसका बहुत प्रयोग किया जाता है। डिफ्थीरिया, टिटैनस आदि रोगों की इसी प्रकार तैयार किए गए ऐंटीटॉक्सिक सीरम से चिकित्सा की जाती है।
खराब इम्यूनिटी के लक्षण -
बार-बार संक्रमण होना या ऐलर्जी -
* अगर
आपको लगता है कि आप दूसरों की अपेक्षा बार-बार बीमार होते हैं, जुकाम की
शिकायत रहती है, खांसी, गला खराब होना या स्किन रैशेज जैसी समस्या रहती है
तो बहुत पॉसिबल है कि यह आपके इम्यून सिस्टम की वजह से हो। कैंडिडा टेस्ट
का पॉजिटिव होना, बार-बार यूटीआई, डायरिया, मसूड़ों में सूजन, मुंह में
छाले वगैरह भी खराब इम्यूनिटी के लक्षण हैं।
* कुछ लोग जरा सा मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं। यह शरीर का तापमान कम होने से हो सकता है। मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए नॉर्मल ऑरल बॉडी टेंपरेचर 36.3 डिग्री से. से नीचे नहीं होना चाहिए। क्योंकि सर्दी के वायरस 33 डिग्री पर सर्वाइव करते हैं।
* रोजाना एक्सर्साइज करने से आप अपनी बॉडी का तापमान और इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं। साथ ही गर्माहट पैदा करने वाले मसाले जैसे लहसुन अदरक, दालचीनी लौंग वगैरह भी बेहद काम के हैं।
इम्यून सिस्टम को कैसे बढ़ाया जाए-
1. संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है.
2. विटमिन डी की कमी
विटमिन डी इम्यूनिटी को बढ़ाता है और ज्यादातर लोगों में इसकी कमी होती है। अगर आपकी ब्लड रिपोर्ट में विटमिन डी की कमी है तो आपको इसका लेवेल सही करने की हर कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा लगातार थकान, आलस या ऐसे घाव जो लंबे वक्त तक न भरें, नींद न आना, डिप्रेशन और डार्क सर्कल भी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता की निशानी है।
बच्चों के आहार में कुछ चीजों को शामिल कर आप उनकी इम्युनिटी को बढ़ा सकते हैं।
अगर आपका बच्चा कमजोर है और जल्दी बीमार पड़ जाता है तो आपको उसकी डायट में यहां बताई गई चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए।
3. पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक, ब्रोकली, पार्सले, केल जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां संक्रमण से लड़ने और बचाने में मदद करती है। इनमें विटामिन ए, सी और के, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्च और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स होते हैं।ये बीटा कैरोटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भी युक्त होती हैं जो कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
4. संतरा, नींबू और अमरूद जैसे खट्टे फलों में उच्च मात्रा में विटामिन-सी होता है एवं यह एंटीऑक्सीडेंट से भी युक्त होता है।
इसके अलावा सिट्रस फल आयरन जैसे पोषक तत्वों को अवशोशित करने में भी शरीर की मदद करते हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
5. दालों में प्रोटीन, फाइबर, फोलेट, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है। प्रोटीन पाने का ये सबसे आसान तरीका है।
दालों में फाइटोकेमिल भी होते हैं जो गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।
6. बादाम, अखरोट, पिस्ता, काूज और मूंगफली एवं बीज जैसे कि कद्दू के बीज, अलसी के बीज, चिया सीड्स और तिल के बीज प्रोटीन, हैल्दी फैट, फाइबर, विटामिन और खनिज पदार्थों को अच्छा स्रोत होते हैं।
ये विटामिन ई से भरपूर होते हैं जो कि एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट है और इम्यूनिटी बढ़ाता है।
7. हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है जिसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं। सदियों से बीमारियों से लड़ने और शरीर को मजबूत बनाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
सभी खाद्य पदार्थों को खा सकते हैं किंतु आप वही खाएं जिससे आप का Digestion आसानी से हो सके,
धन्यवाद,


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें