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सोमवार, 27 अप्रैल 2020

How to improve immune system of the body ? Immune system को कैसे बढ़ाया जाए ?



Corona वायरस / COVID 19 के आने के बाद सर्च साइटों पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला key word है-

 

 How to improve immune system of the body ?

इम्यून सिस्टम को कैसे बढ़ाया जाए ?


इस Corona Virus ने हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति सोचने के लिए मजबूर कर दिया है , नहीं तो हम अपनी जिंदगी ऐसे ही भागदौड़ वाली जी रहे थे , न खाने की चिंता, ना आराम की की हम,
आधुनिक युग में दौड़ भरी जिंदगी जीते हुए अपनी इम्यून सिस्टम को नजरअंदाज करते हुए जा रहे थे
लेकिन Corona वायरस ने हम सभी को immune system  के बारे में सोचने के लिए मजबूर कर   दिया है

रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार ये खानपान की लापरवाही की वजह से होता है,कई बार नशा करने की गलत आदतों के चलते और कई बार यह जन्मजात कमजोरी की वजह से भी होता है.

अब सवाल ये उठता है कि अगर इम्यून पावर कमजोर हो जाए तो उसे बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? यहां ऐसे ही कुछ उपायों का जिक्र है जिन्हें आजमाकर आप एक सप्ताह के भीतर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं ,

Immune System  बढ़ाने से पहले जानेंगे -

What is immunity?


संक्रामक रोगों का निवारण करने की शरीर की शक्ति को प्रतिरक्षा(Immunity) कहते हैं।
किंतु सभी शक्तियाँ प्रतिरक्षा में नहीं गिनी जातीं। त्वचा जीवाणुओं को शरीर में प्रविष्ट नहीं होने देती।
आमाशयिक रस का अम्ल जीवाणुओं को नष्ट कर देता है, किंतु यह प्रतिरक्षा के अंतर्गत नहीं आता।
ये शरीर की रक्षा के प्राकृतिक साधन हैं।
प्रतिरक्षा से अर्थ है ब्राह्य प्रोटीनों को रक्त में उपस्थित विशिष्ट वस्तुओं द्वारा नष्ट कर डालने की शक्ति। जीवाणु जो शरीर में प्रविष्ट होते हैं, उनके शरीरों के घुलने से प्रोटीन उत्पन्न होते हैं। उनकी नष्ट कर देने की शक्ति रक्त में होती है। इस क्रिया का रूप रासायनिक तथा भौतिक होता है, यद्यपि यह शक्ति कुछ सीमा तक प्राकृतिक होती है, किंतु वह विशेषकर उपार्जित (aquired) होती है और जीवाणुओं और वाइरसों (viruses) के शरीर में प्रविष्ट होने से शरीर में इन कारणों को नष्ट करनेवाली वस्तुएँ उत्पन्न हो जाती हैं। यह विशिष्ट (specific) प्रतिरक्षा कहलाती है। इन रोगों के कीटाणुओं को प्राणी के शरीर में प्रविष्ट किया जाता है, तो उससे शरीर उनका नाश करने वाली वस्तुएँ स्वयं बनाता है। यह सक्रिय रोग क्षमता है। इसको उत्पन्न करने के लिये जिस वस्तु को शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है वह वैक्सीन कहलाती है।
जब एक जंतु के शरीर में वैक्सीन प्रविष्ट करने से सक्रिय क्षमता उत्पन्न हो जाती है, तो उसके शरीर से थोड़ा रक्त निकालकर, उसके सीरम को पृथक्‌ करके, उसको दूसरे जंतु के शरीर में प्रविष्ट करने से निष्क्रिय क्षमता उत्पन्न होती है। अर्थात्‌ एक जंतु का शरीर उन जीवाणुनाशक वस्तुओं को उत्पन्न करता है और इन प्रतिरक्षक वस्तुओं को दूसरे जंतु के शरीर में प्रविष्ट करके उसको रोगनाशक शक्ति से संपन्न कर दिया जाता है। यह हुई निष्क्रिय प्रतिरक्षा।
चिकित्सा में इसका बहुत प्रयोग किया जाता है। डिफ्थीरिया, टिटैनस आदि रोगों की इसी प्रकार तैयार किए गए ऐंटीटॉक्सिक सीरम से चिकित्सा की जाती है।

खराब इम्यूनिटी के लक्षण -


बार-बार संक्रमण होना या ऐलर्जी -

*  अगर आपको लगता है कि आप दूसरों की अपेक्षा बार-बार बीमार होते हैं, जुकाम की शिकायत रहती है, खांसी, गला खराब होना या स्किन रैशेज जैसी समस्या रहती है तो बहुत पॉसिबल है कि यह आपके इम्यून सिस्टम की वजह से हो। कैंडिडा टेस्ट का पॉजिटिव होना, बार-बार यूटीआई, डायरिया, मसूड़ों में सूजन, मुंह में छाले वगैरह भी खराब इम्यूनिटी के लक्षण हैं। 

*  कुछ लोग जरा सा मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं। यह शरीर का तापमान कम होने से हो सकता है।   मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए नॉर्मल ऑरल बॉडी टेंपरेचर 36.3 डिग्री से. से नीचे नहीं होना चाहिए। क्योंकि सर्दी के वायरस 33 डिग्री पर सर्वाइव करते हैं।

*  रोजाना एक्सर्साइज करने से आप अपनी बॉडी का तापमान और इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं। साथ ही गर्माहट पैदा करने वाले मसाले जैसे लहसुन अदरक, दालचीनी लौंग वगैरह भी बेहद काम के हैं।

इम्यून सिस्टम को कैसे बढ़ाया जाए-


1.  संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए विटामिन सी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है.

2. विटमिन डी की कमी 
विटमिन डी इम्यूनिटी को बढ़ाता है और ज्यादातर लोगों में इसकी कमी होती है। अगर आपकी ब्लड रिपोर्ट में विटमिन डी की कमी है तो आपको इसका लेवेल सही करने की हर कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा लगातार थकान, आलस या ऐसे घाव जो लंबे वक्त तक न भरें, नींद न आना, डिप्रेशन और डार्क सर्कल भी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता की निशानी है।


बच्‍चों के आहार में कुछ चीजों को शामिल कर आप उनकी इम्युनिटी को बढ़ा सकते हैं।  

 अगर आपका बच्‍चा कमजोर है और जल्‍दी बीमार पड़ जाता है तो आपको उसकी डायट में यहां बताई गई चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए।

3.  पत्तागोभी, फूलगोभी, पालक, ब्रोकली, पार्सले, केल जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां संक्रमण से लड़ने और बचाने में मदद करती है। इनमें विटामिन ए, सी और के, कैल्शियम, आयरन, मैग्‍नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्‍च और माइक्रो न्‍यूट्रिएंट्स होते हैं।
 ये बीटा कैरोटीन जैसे एंटीऑक्‍सीडेंट से भी युक्‍त होती हैं जो कि इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

4.  संतरा, नींबू और अमरूद जैसे खट्टे फलों में उच्‍च मात्रा में विटामिन-सी होता है एवं यह एंटीऑक्‍सीडेंट से भी युक्‍त होता है।
 इसके अलावा सिट्रस फल आयरन जैसे पोषक तत्‍वों को अवशोशित करने में भी शरीर की मदद करते हैं और इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाते हैं।


5.  दालों में प्रोटीन, फाइबर, फोलेट, आयरन, कैल्शियम, मैग्‍नीशियम, जिंक और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है। प्रोटीन पाने का ये सबसे आसान तरीका है।
 दालों में फाइटोकेमिल भी होते हैं जो गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

6.  बादाम, अखरोट, पिस्‍ता, काूज और मूंगफली एवं बीज जैसे कि कद्दू के बीज, अलसी के बीज, चिया सीड्स और तिल के बीज प्रोटीन, हैल्‍दी फैट, फाइबर, विटामिन और खनिज पदार्थों को अच्‍छा स्रोत होते हैं।
 ये विटामिन ई से भरपूर होते हैं जो कि एक महत्‍वपूर्ण एंटीऑक्‍सीडेंट है और इम्‍यूनिटी बढ़ाता है।

7.  हल्‍दी में करक्‍यूमिन नामक तत्‍व होता है जिसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं। सदियों से बीमारियों से लड़ने और शरीर को मजबूत बनाने के लिए हल्‍दी का इस्‍तेमाल किया जाता रहा है।

सभी खाद्य पदार्थों को खा सकते हैं किंतु आप वही खाएं जिससे आप   का Digestion   आसानी से हो सके,
 धन्यवाद,


मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

What is Balanced Nutrition & Micro nutrition?



कुपोषण का अर्थ है 'पोषण की कमी' 


यदि कोई बच्चा कुपोषित है तो इसका अर्थ है कि उसकी शारीरिक एवं व मानसिक वृद्धि प्रभावित हो रही है,

भारत में कुपोषण की समस्या बहुत ही गंभीर है और  उत्तर प्रदेश में 10 में 5 बच्चे कुपोषण का शिकार है इसी प्रकार लगभग भारत के सभी राज्यों का आंकड़ा यही है

 कुपोषण केवल बच्चों में ही नहीं , गर्भवती, धात्री,  महिला पुरुष सभी में व्याप्त है,


 वयस्कों  में यह मोटापा व पतलापन के रूप में दिखाई देता है
पतला दिखना या शारीरिक रूप से कमजोर दिखना ,  मे तो कुपोषण साफ दिखता है,

 लेकिन मोटापा भी कुपोषण का ही एक रूप है|

कुपोषण के कारण :-


1. गरीबी ,बेरोजगारी , सरकारी रणनीतियां
    ( आर्थिक संगठनात्मक एवं मानव संसाधन)
2. भोजन की  अपर्याप्त उपलब्धता
3. बच्चों और महिलाओं की अपर्याप्त देखभाल
4.  अस्वस्थ वातावरण
5. अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं



 कुपोषण के परिणाम :-


अगर बच्चा कुपोषित है तो यह क्षमता क्षीण हो जाती है-

1. स्वस्थ शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है
2.  बच्चा बार-बार  बीमार पड़ता है,  इस कारण death की संभावना भी बढ़ जाती है
3. शारीरिक व बौद्धिक विकास में कमी आ जाती है
4. वयस्क होने पर कार्य क्षमता एवं कमाने की क्षमता में भी कमी आ सकती है
5.  पढ़ाई में पिछड़ सकता है
6. सुस्त शरीर
7. कमजोर वयस्क



 कुपोषण का शिकार कौन अधिक हो सकता है? ? 

1. गर्भवती माताएं
2.  कम वजन के नवजात शिशु व नवजात
3.  किशोरी
4.  5 वर्ष  तक की आयु के बच्चे

 यह सब जानने के बाद-
 हम जानेंगे

What is Balanced Nutrition? 


Ensuring we get a daily supply of a daily supply of get a daily supply of of the adequate amount of nutrients from our diet to to stay healthy.


संतुलित पोषण क्या है ? 


संतुलित भोजन वह है जो हमारे खाने में से जरूरी पोषक तत्वों को बराबर मात्रा में हमारे शरीर की जरूरतों के आधार पर प्रदान करता है |

 न्यूट्रिशन  हर रोज जरूरी है
/ Nutrients we need everyday. 

1. Protein
2.Minerals
3.Carbohydrate
4.Essential fat
5.Water
6.Fibre
6.Herbs etc


हम सभी को न्यूट्रिशन की क्या जरूरत है? 

Why Nutrition?? 


 यह मदद करता है...

1. वृद्धि व विकास व रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है
2. पौष्टिकता की घटक को पूरी करता है
3. Nervous system को मजबूत करता है
4. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
5. जल्दी बुढ़ापा नहीं आने देता है
6. तनावपूर्ण ,जीवनशैली , खाने की आदत आदत को ठीक करता है
7. रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है




अभी तक हमने चर्चा किए हैं

कुपोषण क्या है
न्यूट्रेशन की क्यों जरूरत जरूरत है

अब हम स्टार्ट करेंगे गर्भावस्था से लेकर बड़े होने तक के   सभी स्टेज में   पोषण की कितनी जरूरत है

गर्भवती एवं धात्री महिला का पोषण-


गर्भावस्था में उचित पोषण से महिला स्वस्थ रहती है ,
एक स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ शिशु को जन्म देती है  |
गर्भवती महिलाओं धात्री माताओं और बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ बेहतर और नियमित पोषण सेवाएं भी अति आवश्यक है , गर्भावस्था के दौरान अगर महिला कुपोषित हो तो कुपोषित शिशु को जन्म देने की संभावना बहुत बढ़ जाती है कुपोषण के कारण कुपोषित शिशुओं की मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है गर्भावस्था के दौरान और जन्म के पश्चात 2 वर्ष तक उचित पोषण सेवाएं और  न्यूट्रीशन ना मिलने से कुपोषण के कुचक्र में फंसने का खतरा बना रहता है |

Mother पोषण



मात्र पोषण स्वस्थ्य बचपन का आधार है,


2 साल तक के बच्चों में व्याप्त कुपोषण का लगभग 50% मां के गर्भ में शिशु विकास से जुड़ा होता है
मां को कुपोषण किन कारणों से हो सकता है

*  वजन का 40 केजी एवं लंबाई 1 फुट 5 सेंटीमीटर से कम
   गर्भवती एवं धात्री महिलाओं का अपर्याप्त भोजन |

*  एनीमिया खून की कमी व   micro nutrient पोषक तत्वों की कमी |

*  दो बच्चों के मध्य कम अंतराल अंतराल तथा बार बार गर्भधारण गर्भधारण|

*  साफ सफाई संबंधी व्यवहार में कमी |

*  समुदाय आधारित परंपराएं मान्यताएं व व्यवहार महिलाओं के खानपान एवं खानपान एवं खानपान एवं एवं देखभाल संबंधी व्यवहार|

गर्भवती एवं धात्री महिला को पोषण के बारे में किन किन के बारे में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?


गर्भावस्था के दौरान एक अतिरिक्त आहार लें |

थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन ग्रहण करें कम से कम 3 कम 3 3 बार और पहले की अपेक्षा डेढ़ गुना मात्रा में भोजन मात्रा में भोजन करें|

और साथ ही 2 बार नाश्ता भी करें ,,

इससे गर्भ में पल रहे बच्चे को उचित विकास होगा धात्री महिला पहले से दुगनी मात्रा में  आहार ले|

गर्भावस्था में आयरन की गोली का सेवन

पहले तिमाही के बाद एक गोली के दर से 180 गोली आयरन के ले|
एनीमिया (हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम होने )पर  2 गोली   प्रतिदिन
  आयरन की गोली जहां तक संभव हो खाना खाने के 1 घंटे बाद या रात में में ले,
ऐसा करने से  Iron tablet प्रभाव जैसे उल्टी आना, जी मिचलाना ,चक्कर आना , सर भारी होना इत्यादि से बचा जा सकता है|
गर्भावस्था के दौरान  आयरन की गोली का सेवन बच्चों के बढ़ने और उनके मस्तिष्क के विकास में मदद करता है गर्भावस्था में आयरन की कमी होने पर मां को एनीमिया हो सकता है,

 जोकि मां, मां व बच्चों दोनों को खतरे की संभावना बढ़ाता है एनीमिया से कम वजन का शिशु तथा प्रसव पश्चात मां को अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना बढ़ जाती है,

गंभीर एनीमिया होने की स्थिति में महिला को डॉक्टर की सलाह पर आयन का इंजेक्शन का इंजेक्शन या खून चढ़ाया जाता है|

गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के लक्षण


*  शारीरिक क्षमता और कार्यक्षमता का कम होना

*  पैरों में ऐंठन और खिंचाव

*  आमतौर पर दिल का धड़कन बढ़ना

*   सुस्ती - थकान

6 माह से 5 वर्ष से 5 वर्ष के बच्चों में एनीमिया के लक्षण


1.कमजोर मानसिक विकास
2. पढ़ाई और खेल में ध्यान कम लगना
3. शारीरिक संचालन क्षमता का कम होना
4. शीघ्र थकान
5. सांस फूलना
6. चक्कर आना
7.  बार-बार बीमार पड़ना
8. व्यवहार संबंधी समस्याएं

**   6 माह से 5 साल  तक के सभी बच्चों को साल में 100 दिन के लिए हर हफ्ते में दो बार 1ml आयरन सिरप देना

गर्भावस्था में वजन वृद्धि को मापे मापे

गर्भावस्था के दौरान 9 से 11  किलोग्राम वजन बढ़ता है ,
चौथे महीने से हर महीने औसतन 1.5 किलोग्राम से 2 किलोग्राम वजन बढ़ता है|

**   सूश्वम पोषक तत्व आयरन, विटामिन ए ,आयोडीन  micro nutrients पोषक है जो मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और एनीमिया जैसी बीमारी से बचाव करता है

इनकी शरीर में काफी कम मात्रा में आवश्यकता होती है इसलिए this is called micro nutrients.  बाल्यावस्था में शारीरिक व मानसिक विकास तेजी से होता है इसलिए बच्चों को इसकी अधिक आवश्यकता होती है,

**    विटामिन ए  micro nutrient  तत्व है
जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
 बच्चों में निमोनिया खसरा मलेरिया डायरिया जैसी बीमारियों से बचाता है ,
इसके सामान्य स्रोत हैं पीली केसरी या लाल रंग  की सब्जियां व फल कुछ हरे पत्ते वाली सब्जियां, अंडे का पीला हिस्सा,
दूध इत्यादि

**  आयोडीन थायराइड ग्लैंड को सही कार्य करने एवं विकास में सहायक होता है,
शरीर की मानसिक और शारीरिक विकास के लिए इसका  नियमित रूप से सेवन जरूरी है
 गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए अति आवश्यक है इसकी कमी होने से बच्चे को गंभीर मंदबुद्धि हो जाती है
 शरीर में आयोडीन की रोजाना 150 माइक्रोग्राम मात्रा में आवश्यकता होती है,
रोजाना आयोडीन युक्त नमक  सेवन करना इसका एक स्रोत है

**   मां का पहला गाढ़ा दूध विटामिन ए का प्रमुख स्रोत है साथ ही 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से बच्चों को विटामिन ए की कमी से बचाया जा सकता है,